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मिशन-2027 से पहले उत्तर प्रदेश भाजपा में अंदरूनी घमासान ने पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है

लखनऊ/उत्तर प्रदेश

मिशन-2027 से पहले उत्तर प्रदेश भाजपा में अंदरूनी घमासान ने पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है। जनप्रतिनिधियों बनाम अधिकारियों और सरकार बनाम संगठन के बीच टकराव अब बंद कमरों से निकलकर सड़कों तक पहुंचने लगा है। सत्ता में रहते हुए ही असंतोष के सुर खुलकर सामने आ रहे हैं, जिसने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

30 जनवरी को महोबा में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और स्थानीय विधायक बृजभूषण के बीच सड़क पर हुआ विवाद इसी बढ़ते आक्रोश का ताजा उदाहरण है। इससे पहले भी कई मौकों पर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर मनमानी और अनदेखी के आरोप लगाए हैं। कुछ मामलों में मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठते नजर आए, जिससे अनुशासन और समन्वय पर सवाल खड़े हुए।

लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद असंतोष और तेज हुआ है। संगठन विस्तार में देरी, मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें और पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच भीतर ही भीतर खींचतान जारी है। पार्टी के लिए चुनौती यह है कि महत्वाकांक्षी नेताओं और नाराज जनप्रतिनिधियों को कैसे साधा जाए।

इन्हीं हालात को देखते हुए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच समन्वय बैठकों का सिलसिला तेज किया जा रहा है। इन बैठकों में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, अनुशासन बनाए रखने और विद्रोही सुरों को शांत करने पर मंथन हो रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी कलह को थामकर एकजुट होकर मैदान में उतरने की है।

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